सुप्रीम कोर्ट के बड़ा आदेश पर संविदा शिक्षकों को रेगुलर करने की प्रक्रिया शुरू – इनको मिलेगा लाभ Contract Employees Regularization

देशभर के लाखों संविदा शिक्षकों के लिए आखिरकार इंतज़ार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब संविदा शिक्षकों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह फैसला उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो सालों से अस्थायी पदों पर काम कर रहे थे और नियमित नौकरी की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित सेवा का लाभ मिलना चाहिए, क्योंकि वे स्थायी कर्मचारियों की तरह ही कार्य कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में साफ कहा कि अगर कोई संविदा कर्मचारी 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निरंतर सेवा में है, तो उसे नियमित करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन शिक्षकों की सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक है और जिन्होंने अपने कार्यकाल में किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना नहीं किया है, उन्हें स्थायी किया जाना चाहिए

किन शिक्षकों को मिलेगा लाभ?

इस आदेश के बाद उन सभी संविदा शिक्षकों को लाभ मिलेगा जिन्होंने लगातार कई वर्षों तक किसी भी प्रकार की सेवा बाधा के बिना काम किया है। विशेष रूप से प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, जिन शिक्षकों ने राज्य सरकार की शिक्षा मिशन या पंचायत विभाग के अंतर्गत कार्य किया है, उन्हें भी रेगुलराइजेशन का लाभ मिल सकता है।

कब से शुरू होगी रेगुलराइजेशन प्रक्रिया?

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद सभी शिक्षा विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वे संविदा शिक्षकों की सेवा स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सूत्रों के अनुसार, नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सबसे पहले उन शिक्षकों को शामिल किया जाएगा जिनकी सेवा अवधि 10 वर्ष से अधिक है। इसके बाद अन्य योग्य शिक्षकों को भी शामिल किया जाएगा।

शिक्षकों में खुशी की लहर

इस आदेश के बाद शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे संविदा शिक्षक अब राहत की सांस ले रहे हैं। कई शिक्षक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट और सरकार दोनों का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह फैसला उनके “लंबे संघर्ष का परिणाम” है, जो अब जाकर सफल हुआ है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश, सरकारी घोषणाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। रेगुलराइजेशन की प्रक्रिया राज्यवार भिन्न हो सकती है। सटीक जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या शिक्षा निदेशालय से संपर्क करें।

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